#मेरा_भटकाव_ही_मेरा_नाम
मुझे मुड़ना था ही नही कहीं
चलता रहा रास्ते पर
मुझे बताना था ही नहीं सच
चुप चुप रहा फासलों संग
मुझे बस ढूंढना था इक अक्स
तलाशता रहा आईनों में
मुझे उतरना था ही नहीं गहरे
दूर खड़ा रहा साहिलों पर
मुझे बनना था ही नहीं किस्सा
बस गुनगुनाता रहा
जिंदगी नामचीन हो
ये चाह नहीं बस
भरी भरी हो आनंद से
किसी भी नाम
मेरा भटकाव ही मेरा नाम
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