Thursday, 14 March 2024

 लो ठहर गया लम्हा लम्हा

क्या कह रहा लम्हा लम्हा


चाँद है मशगूल बातों में

चांदनी संग भीगी रातों में

मचल रहा लम्हा लम्हा

लो ठहर गया लम्हा लम्हा.....


आगोश में  नशा नशा

मदहोश है समाँ समाँ

पिघल रहा लम्हा लम्हा

सहम गया लम्हा लम्हा.....


सच किरच किरच गया

बन हकीकत बिखर गया

सिहर गया लम्हा लम्हा

सहम गया लम्हा लम्हा....


टूटे बिखरे रिश्ते कुछ

निखरे से हैं दिखते कुछ

सुलझ रहा लम्हा लम्हा

सहम गया लम्हा लम्हा ....


बोलूं क्या है गहरे मन

खोलूं क्या है पहरे मन 

महक रहा लम्हा लम्हा

सहम गया लम्हा लम्हा.....


थमी थमी सी सांस है

बढ़ी बढ़ी सी प्यास है 

तरस रहा लम्हा लम्हा

ठहर गया लम्हा लम्हा...


लफ़्ज़ों में है खामोशियां  

आंखो में हैं तन्हाईयां

सिमट रहा लम्हा लम्हा

ठहर गया लम्हा लम्हा


ख्वाब सारे हैं बेक़रार

शब कहे करो इन्तज़ार

सहर हुई लम्हा लम्हा

ठहर गया लम्हा लम्हा

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