Saturday, 16 March 2024

बस एक शब्द

 असर ..... ज़िंदगी में 

होता है एक ही शब्द से 

बदल जाती है ज़िंदगी  

कहीं  करीब से 

मैं ढूंढ रहा हूँ कब से ......

वो एक शब्द ...बूंद सा ...

जो समंदर बन जाता है 

वो एक शब्द ...

शबनम सा ....

भीगा भीगा ..............

अंतर तक भिगोता हुआ 

वो एक शब्द ...

बारिश की फुहार सा 

बरसता हुआ .....

भिगो देता है पूरी  शाम 

सोने नहीं देता है फिर रात को 

शब्द भी कमाल है....

बदल लेता है अपना स्वरूप 

बन  जाता है ख्वाब  ....

जगाता हुआ .....

दूर .....दूर से धुन प्रीत की 

बांसुरी सी गूंज ......   

पूरा आकाश बन जाता है जगमगाता  चाँद 

हवाओं में  बस एक गीत 

कब कोई ख्वाब  झूला झुलाने लगता है 

देह- मन- आत्मा ......

सब एक ही शब्द 

गंध- गीत- प्रीत का  आलोक 

कोई दिव्य लोक 

कोई अनन्य राग 

एक शब्द गहराता हुआ अंतर में 

बिखर जाता है 

शब्द ......मुझे मिलता नहीं 

मुझमें मिल जाता है...कोई  

मैं शब्द हूँ ....

शब्द की तलाश में 

उस चरम बिन्दु  की तलाश में 

जब मैं शब्द बन जाऊँ .... मगर बिखरूँ नहीं 

........मुझे ढूँढना है 

बस एक शब्द ..

मुझमें ही मुझसे ही ...........

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