Tuesday, 18 June 2024

गहन साधना सरस सहज हो


 ध्यान में उतरो, गहन अतल मन

स्वयं के सन्मुख, प्रश्न रहित मन

किससे बंधा पहचान सिक्त मन 

विलग हो मोह से,आवर्तित मन

मूल चक्र संग ऊर्ध्व प्रवाह बन

स्थिर गति संग अविचलित मन

चक्रित ऊर्जा के क्रम सम मन

लय बद्ध स्वरूप संस्कारित मन

नव नव आकर्षण में प्रवाहित

गतिमय चक्र संग ऊर्जित मन

ऊर्ध्व गमन ही श्रेष्ठ भाव गति

साध साध यही अविरत मन

गहन साधना सरस सहज हो

सत्य स्वरूप संग जागृत मन

इति शुभम् 

Wednesday, 5 June 2024

ध्यान बोध गीत

 बोध गीत

बाँध मन, मन बाँध ले, 

तू चेतना की धार को

भाव में जो है अवस्थित

कर प्रकट आधार को


जो हृदय में गूंज उठे

प्रेम स्वर स्वरूप है

जो नयन धारा बहे

भाव गंगा स्वरूप है

मूंद कर आंखे तू सुन

संवेदना अवधान को...बांध मन 




है सहज वो नित्य दर्शन

कर प्रभु का ध्यान कर

कर सरस भावों में रूपित 

गहन अनुभव भान कर

श्रद्धा और विश्वास संग

मन साध शक्ति ज्ञान को...बांध मन


जो रुका अवरोध बन 

उसका सहज तू द्वार बन

द्वेष, दोष, विकार मुक्त

निर्विकार संस्कार बन

पुण्य भावों का सृजन

अभिराम हो साकार हो...बांध मन

इति शुभम्