सुनो मन ...
खिली खिली हो चांदनी
गगनाभिराम चाँद हो
अंतस खिला गुलाब हो
मन में सुगंध हो प्यार हो...
नहीं दृश्य हो बहि रूप में,
रहे वास अन्तःस्वरूप में
अनुभूति में परिभाष हो
मन में सुगंध हो प्यार हो...
हो नित्य नव आराधना
हो अनंत भाव में साधना
सृजन लय अविराम हो
मन में सुगंध हो प्यार हो...
सौ गंध हो, सौगंध हो
अंतस प्रणय अनुबंध हो
खिलता हुआ विश्वास हो
मन में सुगंध हो प्यार हो..
नव नव प्रकट हो चेतना,
जागृत रखे अवचेतना
सतत यही अभिलाष हो
मन में सुगंध हो प्यार हो ....
No comments:
Post a Comment