Wednesday, 6 March 2024

जीवन_चिरंतन_यही_है__तत्वबोध

 #जीवन_चिरंतन_यही_है__तत्वबोध

बर्फ पिघल जाएगी

बर्फ को पिघलना ही होता है

अंतर में उष्ण प्रवाह लुप्त

ताप प्रस्फुटन कब और कैसे हो

कोई चैतन्य अलाव नहीं 

अभिन्न भाव प्रवाह नहीं

मन अंतर में दरारें

दरारों में बर्फ ही बर्फ

दरारों में मौजूद मौन परछाइयां

अपेक्षाएं ही अपेक्षाएं

कोई खुला दरवाजा नहीं

कौन खोले चेतना में द्वार

कभी कभी बर्फ पिघलती नहीं

जमी जमी बर्फ रिश्तों के बीच 

जमती जाती हैं परत दर परत

लम्हों से सदियों तक

कोई उष्ण भाव प्रवाह नहीं 

ना बाहर... ना अंदर ...

बस जमता हुआ मौन निरंतर

परत दर परत 

जीवन चेतना सुप्त

बर्फ के पिघलने की प्रतीक्षा में

कभी होगा प्रखर चेतना में सूरज  या

फटेगा भावों का ज्वालामुखी 

बहेगा गरम लावा अपेक्षाओं का 

पिघल जाएगी परतें बर्फ की

बांध नहीं पाएगा मन बूंद बूंद को भी

सागर पसर जाएगा अनंत तक

बोध होगा रूपांतरण का  

बर्फ सा जमना पिघलना ही जीवन चिरंतन ... 

यही है तत्व बोध

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