आ उतर अब तो ज़मीं पर
आस तुझसे तू आसरा बन
मन गगन जब उड़ना चाहे
अंतर उतर कर आसमां बन
बह रही जो चाहतें अश्क संग
तू समंदर चाह तू राजदां बन
तू नज़र बन ना बेनज़र रह
आशनाई हूं मैं तू आशना बन
हर सहर बन उजला चेहरा
तू ही सलामत आइना बन
अब रहम नहीं रहबरी कर
तू हमसफ़र तू ही रास्ता बन
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