होती ख़ुशी मेहमान सी,
पहचान लो ज़रा
निगल रहे अँधेरे सब
महताब,आफ़ताब अब
खिली हंसी अंजान सी,
पहचान लो ज़रा
उन्वान नाम ज़िन्दगी,
चाहतों के अर्श का
चाहत मिली उड़ान सी,
पहचान लो ज़रा
परव़ाज में रखो जवां
ख्वाब-अहले-यक़ीं
आवारगी अज़ान सी,
पहचान लो ज़रा
सागर किनारे मौज़ सँग
रहती है बिखरी हंसी
छूकर गई अरमान सी,
पहचान लो ज़रा
खुद लिखो अरमान सी
दास्तान- ए- ज़िन्दगी
मंज़िल खड़ी फरमान सी
पहचान लो ज़रा
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