है मेरा अलग अंदाज
.....वक़्त को टटोलता हूँ
है इक अल्हदा मिज़ाज़
....खुद से ज्यादा बोलता हूँ
है कोई आवारा बाम
....खामोश दर खोलता हूँ
है ज़ुनूने रंगे- सहर
.... शबे-ख्वाब मैं बटोरता हूँ
है यही मेरा अक्से- सच
..... झूठे आईने तोड़ता हूँ
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