अभिन्नता आचार में
अनन्यता विस्तार में
अनंत असीम प्रेम हो
गहनता हो विचार में
सरस सरल संबंध हो
सहजता संस्कार में
दुराव ना छिपाव हो
सत्यता व्यवहार में
निष्ठा हो संकल्प में
स्वीकार्यता हर हाल में
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