अर्पण, तर्पण, त्याग, समर्पण
प्रेम ध्यान के अनुभव में...
अर्पण, तर्पण, त्याग, समर्पण ये भाव तत्व हमें सहज रूप से प्रेम ध्यान में गहराई से अनन्य भाव से कहते हैं:
- अर्पण (समर्पण): यह भाव हमें अपनी आत्मा को परमात्मा के समक्ष समर्पित करने की भावना देता है।
- तर्पण (संतोष): इससे हम वर्तमान के साथ रहते हैं, न केवल अपने उद्यम के लिए, बल्कि अपने पूर्णता में।
- त्याग (त्याग): यह हमें भौतिक और मानसिक आसक्तियों से मुक्त करने की क्षमता देता है।
- समर्पण (समर्पण): इससे हम अपने कार्य और सेवाएँ ईश्वर के लिए समर्पित करते हैं।
- आत्म-समर्पण (आत्म-समर्पण): यह हमें अपनी आत्मा को पूरी तरह से ईश्वर के हाथों में समर्पित करने की भावना देता है।
- प्रेम (प्यार): यह सभी भावों को जोड़ता है और हम सभी को प्रति स्नेह और सहानुभूति की भावना देता है।
- ध्यान (साहित्य): इससे हम अपने मन को शांत और एकाग्र करते हैं, जिससे ईश्वर के साथ आत्मीय योग स्थिति में शामिल हो जाता है।
- विश्वास (विश्वास): यह हमें ईश्वर और आपकी कृपा से पूर्णतः स्थिर रहने की क्षमता देता है।
- संयम (आत्म-नियंत्रण): यह हमें अपनी इंद्रियों और मन को नियंत्रित करने की क्षमता देता है।
- ग्रेस (अनुग्रह): यह ईश्वर की कृपा से भावना प्राप्त होती है, जो हमें अपने ध्यान के माध्यम से आत्मा को प्राप्त करने में सहायता करती है।
प्रेम अद्भुत भाव है, ध्यान में स्थिरता स्थापित करने के लिए ताकि जीवन प्रेम स्वरूप का सहज दर्पण सा दिखाई दे। इस भाव की जागृति को उन्नत साधना प्रयास सहज रूप से विकसित करें
- स्वयं को समर्पित करें: अपने स्वार्थ को छोड़ें स्टॉक के प्रति समर्पित भाव विकसित करें।
- ध्यान में बने रहें: ध्यान और मेधावी वाणी के माध्यम से प्रेम को अपने मन में स्थिर बनाए रखें।
- दयालुता का विस्तार करें: दुखों और सुखों के शब्दों की आलोचना करें और उन्हें सहानुभूति और सहायता प्रदान करें।
- सहजता से रहो: जीवन के हर क्षण में प्रेम का अनुभव करो, फिर भी वह छोटा हो या बड़ा।
- स्वानुभूति का विकास: अपने आत्म-स्वरूप की निंदा नहीं करें और प्रेम की ऊर्जा को प्रतिष्ठित बनाये रखें।
- अपने व्यवहार में स्नेह और प्रेम को रखें, और दोस्त की मदद करें।
- संयम और उपासना: संयम और ध्यान की प्रतिष्ठा करें।
- साधु-संगति: साधु या प्रेमी लोगों के साथ संगति करें, जो प्रेम की ऊर्जा को प्रतिष्ठित रूप से बनाए रखने में सहायता कर सकते हैं।
- सतत प्रयास: प्रेम को ध्यान में रखकर बनाए रखने के लिए सतत प्रयास करना, और यह अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इति शुभम्

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