Monday, 13 May 2024

मनन ध्यान

  

मोहित मन में सम्मोहन है

मनन ध्यान के अनुभव में...



मनुष्य के मन के गहराई में छिपी सम्मोहनी शक्ति को जानना और महसूस करना विशिष्ट अनुभव क्षेत्र है। सम्मोहन शक्ति का अनुभव करने के लिए गहन ध्यान और मनन की आवश्यकता होती है।

यह ध्यान अभ्यास आत्म परिष्करण हेतु काफी प्रभावशाली है।

मन को ध्यान में अवस्थित करने के लिए सकारात्मक अनुभवों का चिंतन अनुचिंतन काफी सहायक  है। यह ध्यान की ऊर्जा को बढ़ाने और मन को शांति प्राप्त करने में मदद करता है।

मनुष्य का जीवन अनेक भावों से भरा होता है जो उसे आंतरिक और दिव्य भावों के साथ जोड़ते हैं। दिव्य भाव सौंदर्य की गहराई जानने हेतु मनन अभ्यास जरूरी  है। यह आत्मा से आंतरिक संवाद की स्थिति है, जिसमें व्यक्ति का मन उच्च स्तर के सम्मोहित भाव में लीन होता है। जिसमें साधना और आनंद का अद्भुत संगम अनुभव हो सकता है।

ध्यान अत्यंत महत्वपूर्ण कौशल हैं। यहाँ ध्यान के दस विशेष चरण हैं:

  • आराम: शांति और स्थिरता के लिए आराम लेना।
  • वात्सल्य: ध्यान को वात्सल्य के साथ करना।
  • आदर: अपने अध्यात्मिक गुरु की आदर करना।
  • स्थिति प्राप्ति: सुखी स्थिति में पहुंचना।
  • ध्यान: मन की एकाग्रता से ध्यान करना।
  • संकल्प: आत्मसमर्पण के संकल्प करना।
  • उपासना: ईश्वर की उपासना करना।
  • स्वाध्याय: स्वयं की अध्ययन करना।
  • ध्यान योग: ध्यान के माध्यम से अपनी आत्मा को जानना।
  • मोक्ष: मोक्ष की प्राप्ति का अभ्यास करना।

ध्यान और मनन का नियमित अभ्यास जीवन में अद्भुत आनंद का सहज संरक्षण और संवर्धन करने में सहायक सकता है।

  1. शांति धारण करना: मन को शांत और नियंत्रित करने के लिए ध्यान की शुरुआत में शांति की अनुभूति करें।
  2. उद्दीपना: अपने ध्यान के उद्देश्य को स्पष्ट करें और उसे अपनी मनस्थिति में स्थापित करें।
  3. आसन: समय लिए जाने के बाद सही आसन बैठें, जो साधना के लिए उपयुक्त हो।
  4. प्राणायाम: सांस लेने और छोड़ने की विधि का अभ्यास करें, जिससे मन को नियंत्रित किया जा सके।
  5. प्रत्याहार: इंद्रियों को बाहरी विषयों से वापस लेने और मन को अपनी अंतर्दृष्टि की ओर मोड़ने का प्रयास करें।
  6. धारणा: एक विशिष्ट विषय पर मन की एकाग्रता को स्थायी रूप से स्थापित करें।
  7. ध्यान: मन की एकाग्रता को स्थिर रखते हुए ध्यान में विचरण करें।
  8. समाधि: मन को पूर्णतः विषय पर ध्यान केंद्रित करके अन्य विचारों से बाहर निकालें।
  9. उपशम: ध्यान के बाद, ध्यानाभ्यास को समाप्त करने के लिए मन को उपशम करें।
  10. आशीर्वाद: ध्यान के फल को स्वीकार करें और आत्मा के अनंत गुणों का अनुभव करें।

इति शुभम् 

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