Tuesday, 18 June 2024

गहन साधना सरस सहज हो


 ध्यान में उतरो, गहन अतल मन

स्वयं के सन्मुख, प्रश्न रहित मन

किससे बंधा पहचान सिक्त मन 

विलग हो मोह से,आवर्तित मन

मूल चक्र संग ऊर्ध्व प्रवाह बन

स्थिर गति संग अविचलित मन

चक्रित ऊर्जा के क्रम सम मन

लय बद्ध स्वरूप संस्कारित मन

नव नव आकर्षण में प्रवाहित

गतिमय चक्र संग ऊर्जित मन

ऊर्ध्व गमन ही श्रेष्ठ भाव गति

साध साध यही अविरत मन

गहन साधना सरस सहज हो

सत्य स्वरूप संग जागृत मन

इति शुभम् 

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