Wednesday, 5 June 2024

ध्यान बोध गीत

 बोध गीत

बाँध मन, मन बाँध ले, 

तू चेतना की धार को

भाव में जो है अवस्थित

कर प्रकट आधार को


जो हृदय में गूंज उठे

प्रेम स्वर स्वरूप है

जो नयन धारा बहे

भाव गंगा स्वरूप है

मूंद कर आंखे तू सुन

संवेदना अवधान को...बांध मन 




है सहज वो नित्य दर्शन

कर प्रभु का ध्यान कर

कर सरस भावों में रूपित 

गहन अनुभव भान कर

श्रद्धा और विश्वास संग

मन साध शक्ति ज्ञान को...बांध मन


जो रुका अवरोध बन 

उसका सहज तू द्वार बन

द्वेष, दोष, विकार मुक्त

निर्विकार संस्कार बन

पुण्य भावों का सृजन

अभिराम हो साकार हो...बांध मन

इति शुभम् 

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