भिन्न भिन्न भावों में गुंजन
सकल ध्यान के अनुभव में...
भिन्न भिन्न भावों में ध्यान यानि एकाकी गुंजन , मन संसार को एक विशिष्ट विषय या विचार पर एकाग्र करने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में, जब हम ध्यान में लगते हैं, हमारे मन के विचार एक स्थिरता प्राप्त करते हैं।
निम्न बिंदुओं में ध्यान अनुभव को समझने की कोशिश करते हैं:
स्थिर बैठकर: शुरू में, सुखासन में स्थिर बैठें।
श्वास ध्यान: अपने श्वास को ध्यान से लें।
शरीर की संज्ञा: अपने शरीर की हर भाग को महसूस करें।
मानसिक शांति: मन को शांत करने के लिए मन्त्र या ध्यान उच्चारण करें।
विचार विवेक: अपने विचारों को विवेकपूर्ण तरीके से देखें।
इंद्रियों का नियंत्रण: अपने इंद्रियों को विकल्प द्वारा नियंत्रित करें।
अपने लक्ष्य को ध्यान में रखें: अपने ध्यान को अपने लक्ष्य पर केंद्रित करें।
अवसाद को दूर करें: अपने मन की अवसाद को दूर करने के लिए प्रेरणात्मक मन्त्रों का उच्चारण करें।
ध्यान की अवस्था में रहें: ध्यान को बिना अव्याप्त किए रखें।
समाप्ति: ध्यान सत्र को समाप्त करके ध्यान से उठें और अपने अनुभवों को समझें।
इस प्रक्रिया में, ध्यान अनुभव हमें अपने आप से और परिवर्तन को समझने में मदद करता है।
सकल या जगत दर्शन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए, हमें इस विश्व के सार को समझने की कोशिश करनी होती है। यहां कुछ चरण हैं जिससे आप इस प्रकार के ध्यान को शुरू कर सकते हैं:
शुरुआती ध्यान: ध्यान सत्र की शुरुआत में, आप अपने आसपास की ध्यान लेने वाले विषयों या प्रसंगों को चिंतन कर सकते हैं।
पंच तत्वों का ध्यान: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और आकाश जैसे प्राकृतिक तत्वों पर ध्यान केंद्रित करें।
मानवीय संबंध : हम सभी मानव हैं, इसलिए हमारे बीच के सम्बन्धों पर ध्यान केंद्रित करें।
सांसारिक अनुभवों का विश्लेषण: जीवन में हम अनेक सांसारिक अनुभवों से गुजरते हैं, इन्हें विचार में लें और उनसे सीखें।
संगीत, कला और साहित्य पर ध्यान: संगीत, कला, और साहित्य के माध्यम से सांसारिक अनुभवों को अनुभव करें और उन पर ध्यान दें।
धार्मिक और दार्शनिक तत्वों का अध्ययन: विभिन्न धर्मों और दार्शनिक परंपराओं को समझें और उन पर ध्यान केंद्रित करें।
सकल या जगत दर्शन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए निम्न चिंतन अनुचिंतन भी सहायक हो सकते हैं:
संवेदनशीलता: अपने आसपास की जगहों, व्यक्तियों और प्राकृतिक तत्वों की संवेदनशीलता बढ़ाएं।
संवाद: दूसरों के साथ बातचीत करें और उनके अनुभवों को समझें।
प्राकृतिक शांति: प्राकृतिक सुंदरता में ध्यान केंद्रित करने के लिए शांतिपूर्ण स्थानों पर जाएं।
आत्म-साक्षात्कार: आत्मा में संवेदनशीलता बढ़ाएं और अपने आत्मा की स्वरूप को समझें।
शांति का अनुभव: चिंतन, मनन और ध्यान के माध्यम से शांति की अनुभूति करें।
समर्पण: अपने कार्यों को भगवान या एक उच्चतम प्रियतम को समर्पित करें।
सेवा: दूसरों की सेवा करें और उनके साथ सहयोग करें।
अनुभवों का सामंजस्य: जीवन के विभिन्न पहलुओं के साथ सामंजस्य बनाए रखें और उन्हें समझें।
इन तरीकों से, आप सकल या जगत दर्शन पर ध्यान केंद्रित करके अपने आसपास के संवेदनशीलता और अनुभवों को समझ सकते हैं। जगत दर्शन पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं और इसकी अद्वितीयता और समृद्धि को महसूस कर सकते हैं।

सकल ध्यान प्रक्रिया के बारे में आपके गहन अनुभव को पढ़कर प्रेरणा मिली है..जीवन -स्पंदन,जीवन-उद्देश्य को कुछ अधिक समझने में यह आलेख अवश्य ही मदद करेगा।
ReplyDeleteमंजुला बहन आपकी सहज अनुभूति ने मुझे अतिरिक्त आश्वस्ति प्रदान की है कि हमारी ध्यान पथ की यात्रा में शब्द ब्रह्म के आध्यात्मिक चिंतन से हमें निश्चित रूप से जीवन स्पंदन के आनंदित करने वाले अनुभव होंगे, ईश्वर हमें अपने सहज दर्शन दे
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