यह ध्यान आत्म-मनन (जिज्ञासा) ध्यान के रूप में प्रकट होता है जिसमें आपका संपूर्ण अस्तित्व आत्मसात हो जाता है
पुण्य ध्यान के दौरान आप चिदाकाश ध्यान के रूप में पद्मासन में बैठें, ॐ का उच्चारण करें और अपने शरीर पर एकाग्र हों
फिर आप अपनी वेशभूषा को कमल के समान शुभ्र और शुद्ध मानें और आपके हाथों में एक सुन्दर पुष्प होगा जो आप अपने ईश्वर को उपहार के रूप में देंगे
आप स्वयं को शुद्ध श्वेत रूप में देखेंगे और मंदिर में प्रवेश करेंगे
मंदिर में आपको एक सुन्दर और कोमल ध्वनि सुनाई देगी और आप अपनी अन्तर्दृष्टि से अपनी दिव्य आत्मा का झिलमिलाता आकार देखेंगे और उसे पुष्प भेंट करेंगे
पुण्य ध्यान आत्म-मनन के साथ स्वार्थहीनता और प्रासंगिक कर्मों की अनुशंसा करता है जो आत्म-सात और स्वर्ग की प्राप्ति के लिए हैं
पुण्य ध्यान के अनुभव करने से साधन हैं आत्म-मनन (जिज्ञासा) ध्यान, चिदाकाश ध्यान, ध्यानावस्था, ॐ का उच्चारण, ॐ की ध्वनि के साथ रक्षा का निर्माण, प्रकाश धारा के साथ संपूर्ण शरीर में प्रवाहित करना, आत्मा का अनुभव करना, ध्यान लगाना, ईश्वर की अनुकम्पा और भव्यता के लिए प्रार्थना करना, स्वयं को देखना, और स्वयं को अहम मानना। यह साधन व्यक्ति को आत्म-सात और स्वर्ग की प्राप्ति के लिए मदद करते हैं।
पुण्य ध्यान के अनुभव से व्यक्ति आत्म-मनन और स्वार्थहीनता के साथ आत्मसात और आत्म-सात की अनुभूति करता है। इससे उत्पन्न होने वाले फायदे में शांति, आत्म-सात, और स्वर्ग की प्राप्ति की अनुभूति शामिल हैं। यह ध्यान आत्मा की उपस्थिति की अकथनीय शांति का अनुभव कराता है और व्यक्ति को अधिचैतन्य अवस्था में ले जाता है। इससे उत्पन्न शांति और आत्म-सात की अनुभूति व्यक्ति को सब जीवों और सम्पूर्ण सृष्टि के साथ एकता का अनुभव कराती है। पुण्य ध्यान में आत्मा का अनुभव करने से व्यक्ति को आत्म-सात की अनुभूति मिलती है जो उसे स्वर्ग की प्राप्ति के लिए अहम है। इससे उत्पन्न होती है व्यक्ति की आत्म-सात और स्वर्ग की प्राप्ति की अनुभूति जो उसे संतोष और आनन्द की अनुभूति प्रदान करती है।
सोमवती अमावस्या( 8.4.24) से शब्द शक्ति के ब्रह्म दर्शन की अभिलाषा ने मन को ईश कृपा से प्रेरित स्पंदन को विभिन्न भाव ध्यान संदर्भ के चिंतन अनुचिन्तन के साथ शब्द ध्यान का अकिंचन प्रयास कर रहा हूं ।आत्म शुद्धिकरण के साथ अपना चित्त शांत, स्थिर और अंतर्मुखी यात्रा पर सहज चलता रहे, यही आकांक्षा है। अनुभव साझा करता रहूंगा अपने ब्लॉग पर ...

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